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Showing posts from May, 2018

वो तु नही है ! वो मै नही हुँ

बहोत दर्द भरा है इस दिल मे बताउ तो बढता है और छुपाउ तो चुभता है रोना चाहु तो आंसु नही है हसना चाहु तो कारण नही है सोना चाहु तो निंद नही है जगना चाहु तो दिन नही है देखना चाहु तो तास्विर नही है ऑखे बंद करना चाहु तो तसव्वुर यही है नास्तिक हो जाऊ तो तु दिखता नही है अस्तिक हो जाउ ताे तु मिलता नही है मंदिर मे जाऊ तो भगवान नही है इंन्साण से मिलु तो इंन्सानियत नही है मोहब्बत करे वो तु नही है नफरत करे वो मै नही हुँ पहिली बात पे मान जाये वो तु नही है बार बार मनाये वो मै नही हुँ एक नजर में प्यार हो जाये वो तु नही है एक नजर में प्यार कर जाऊ वो मै नही हुँ तेरी खुँशी मे हस जाउ वो में नही हुँ मेरे गम मे रो जाये वो तु नही है जिसके लिए दुवां करता हुँ वो तु नही हेै तेरे लिए बददुवा करु वो मै नही हुँ पिणा चाहु तो वक्त नही है पिणा ना चाहु तो जाम यही है पाणा चाहु तो हसरत नही है खोणा चाहु तो लगाव यही है बताना चाहु तो शब्द नही है चुप रहणे कि रित नही है चुप रहणे की फित्रत नही है पास रहु तो एतबार नही है दुर रहु तो परहेज नही हे मांगु तो साथ नही है ना मांगु तो हात य...

मै फिर भी चल रहा हुँ

राह है अंजानि फिर भी चल रहा हुँ मंजिल है खोई फिर भी चल रहा हुँ अपनो से बिछड रहा हुँ फिर भी चल रहा हुँ कौनसी चाहत है पता नही फीर भी चल रहा हुँ रास्ते मे ठोकर लागि फिर भी चल रहा हुँ आँखो से आसु बहे या पैरो से खुन बहे मै फिर भी चल रहा हुँ मै अपनो से टुट रहा हुँ रुठों से और रुठ रहा हुँ मै फिर भी चल रहा हुँ मुझे ठेहेरणा नही आ रहा मै दौडना नही चाह रहा मै गिर रहा हुँ संभल रहा हुँ मै फिर भी चल रहा हुँ तुफानो से भिडने की ताकद नही है मै फिर भि तुफानो से भिड रहा हुँ मै तुफानो मे थोड़ी देर से ही सही एक एक पैर आगे दाल रहा हुँ मै फिर भी चल रहा हुँ जहा हर एक कष्टि डुब रही है मै अपनी कष्टि का एक एक छेद भर रहा हुँ मै बडीसे बड़ी लहरों को हात फैलाकर के खुद मे समाये जा ऱहा हुँ मेरे घुटने जामिन मे गढ गये है,पाव मे छाले पड गये है ,आँखो मे आसु है और दिल मे घाव है मै फिर भी चल रहा हुँ मै फिर भी चल रहा हुँ

तुम पुछते हो 

तुम पुछते हो अंधेरे से इतना लगाव क्युँ है, अंधरे से लगाव नही है बस रोशनी से  आँखो को तकलिफ होति है तुम पुछते हो तुमसे प्यार इतना क्युँ  हे, तुमसे प्यार नही बस नफरत औरो से थोड़ी कम है तुम पुछते हो जितके भि इतने उदास क्यूं हो, उदासनही बस जो हारा है उससे थोड़ा लगाव है तुम पुछते हो क्यु भरोसे से नफरत है, नफरत नही बस भरोसा टुटने से परहेज है

दिल की बाते

हो अगर मुझसे शिकायत तो सिधे आकर बता देना ,मुझसे हुई शिकायतो को गैरो के मुँह मे शरीक ना कर देना
फैला हुआ काजल युं ना छुपा चेहरे का काजल नजर से बचाने के लिए होता है नजरे छुपाणे के लिए नही
आँखो मे युं काजल ना लगाया कर,लगता है आँखो के समंदर मे काला तुफान आया हो, और मेरी कष्टि इतनि मजबुत नही की इन काले तुफानो से भिड जाये
आयने में देख कर सुरत को इतना तराशा ना करो,तुझको खुदमे पाकर वो आयना मेरी तरहा टुट ना जाये
खुदका गम दुसरो के शब्दो मे ढुँढने की कोशिश करता हुँ इंसान हुँ इंसान को पढणे की कोशिश करता हुँ
तब तक इज्जत मिली जब तक दुनिया के उसुलो मे था जब से अपने उसुल बनाये दुनिया से सिर्फ गाली ही मीली
युं ईबादत ना कर बेखबर कहीं गलतीसे दुवा मे हमारा नाम आ गया ना तो जींदगी भर पछतायेगी😌

काश थोडा और रुक गया होता

काश थोडा और रुक गया होता तो आज कीसी और मुकाम पे होता काश थोडा और रुक गया होता काश सालो पहले तुझे ना कहने से पहले हा कह दिया होता तो आज कीसी और जन्नत मे होता काश कल तुझे हा कहणे से पहले ना कह दिया होता तो आज मेरी पहीली जन्नत मे ही खुश होता काश इस हा और ना मे थोडा और रुक गया होता काश थोडा और रुक गया होता काश तेरे पहले दिदार का लम्हा थोडे और लम्हे रुक गया होता काश थोडा और रुक गया होता