हा मै काल हुँ आँखो से आँखो तक कि मजाल हुँ हा मै काल हुँ कृष्ण के अंगुठे के पार मै वो बाण हुँ मै काल हुँ कृष्ण का चक्र मै मौजुद हर एक अस्त्र मै शिशुपाल के सौ पांपो का घडा मै महाभारत के पल पल मे खडा मै हा मै काल हुँ आँखो से आँखो तक कि मजाल हुँ मै काल हुँ भिष्म का वचन मै मै द्रोपदि का हरन हुँ लोगो का कर्म मै मै कर्मो का उत्तर हुँ मै काल हुँ हा मै काल हुँ शब्दो का जाल हुँ अभिमन्यु का हाल हुँ युधिष्ठिर का झुठ मै पुण्य से अछुत हुँ गिता का अर्थ मै गिता सुनने वाला पार्थ मै विश्वरुप में से एक हुँ मै काल शोर चुपचाप हुँ हा मै काल हुँ विदुर के शब्द मै दुर्योधन कि बुध्दि हुँ चिरहरन मे दुशासन के हात मै मै एक अकेला आवाज विकर्ण हुँ मै काल हुँ गांडिव का तिर मै रथ पे सवार विर मै पाण्डवो का धिर हुँ मै कौरवों पे समशिर हुँ सर्वश्रेष्ठ धर्नुधर मै दलदल मे फसा हुआ चक्र हुँ मै काल मै शोर चुपचाप हुँ
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Showing posts from 2019
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ये कैसि तेरि जालिम मेरी तुझपे मोहब्बत है पल पल बस तबाह किए जाति है इस उडते धुवे के साथ हर एक याँद मिटाति जाति है बाहर से खुद भि जलति जाति है अंदर से मुझे जलाति जाति है इश्क मुझसे करति भि नहि नफरत तुझसे होने भि नहि देति है तु पुरी जल जाति है,मुझे बचाकुचा पुरा जलाने के लिए फिरसे पहले सिरे से जलना शुरु हो जाति है
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अफवाओं में "मै" अलग अलग मुझे बहोत बार आया सुनने को मै ठेहरा रहा बरसों तक असलि "मै" बताने को हजार आवाजे थि मुझे मेरी मंजिल बताने को मै चलता रहा बरसों तक मेरी खुदकी आवाज सुनने को सौ याँदे थि मुझे पिछे कल में ले जाने को मै आगे कल कि ओर बढता रहा एक दों वादें निभाने को मेरी जंग नहि थि फिर भि लढता रहा दिए हुए वादों का साथ देने को मै लढता रहा ये जानते हुए भि कि साथि तयार है बिच लढाई में मेरा साथ छोड जाने को :-@bhi
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हार से पार हुँ मै जित का त्योंहार हुँ मुश्किलो से क्युँ डरुँ उनका तो मै यार हुँ शोहरतों का वार हुँ मै जिल्लतो का प्यार हुँ तकदिर से खाई हुई मार हुँ अफताब मै उगने के लिए तयार हुँ कलियुग का अवतार हूँ मै खुदसे आई पुकार हुँ बुराई में दरार हुँ मै अच्छाई की दरकार हुँ प्यार का इजहार हुँ मै विश्वास का इकरार हुँ वफाई कि दिवार हुँ मै बेवफाई पे धिक्कार हुँ तुफानो में कश्तियो कि पतवार हुँ तेरी सलामति पे जान निसार हुँ जिंदगि का तेरी पहरेदार हुँ मै हार से पार हुँ :-@bhi
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मैफिले जिसके नफरतो की लगी थि,मै उसकि तारीफ कर बैठा जिसके खिलाफ शिकायते आ रहि थि,मै उसकि खासियते बोल बैठा उसके दुश्मनो के इलाके में,मै उसको अपना दोस्त बता बैठा जख्म जिससे आए,मै उसीके हात में नमक दे बैठा जो बात याद रखनि थि,मै बस वहि बात भुल बैठा जिसके खिलाफ जाने की साजिशे हो रहि थि,मै उसका हि साथ दे बैठा बात जिसे मारने कि हो रहि थि,मै उसि को बचा बैठा जो नहि करना था,मै नादान वहि कर बैठा :-@bhi
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ना राहि,ना राह,ना मंजिल ना उसकि चाह मै अकेला हुँ अकेला हि रेहना पसंद करता हुँ मै सुरज हुआ तो दिन में हि निकलना पसंद करता हुँ मै रात के अंधेरे में अकेला चाँद होना पसंद करता हुँ बात एसि नहि कि तुम मुझे बुरा समझते हो, अच्छा है तुम वो समझते हो, मै बुरा समझा जाऊँ,मै वहि पसंद करता हुँ बहोत बार सुना है मै समझता नहि कुछ, तुम मुझे नासमझ समझो सच बताता हुँ,मै नासमझ समझ जाना हि पसंद करता हुँ :-@bhi
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हालातों से हारकर जमिन पर गिर गया मै माँगता रहा मदत हर एक से हर शख्स पिठ दिखाता गया कुछ लोग दे गए भरोसा हात जरुर देंगे मै नादान भरोसा करता गया बोलते गए अपने 'यही पास हि है मंजिल' मै बरसौ कहि गयि राह पे चलता गया बेहकाते गए मुझे खुदसे मै बेहकावे को सच मानता गया सब लोग बताते रहे "जाना कहाँ है" "कैसे?" पुछने पर चेहरा मुकरता गया मै नादान भरोसा करता गया :-@bhi
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just realized,everytime i am reading any book or listening to a podcast those things are ultimately meeting to only one point that tell yourself you are happy or you are gonna get that bike no matter what and without giving a second thought i tried to do that i tried repeating some affirmation to myself but now when i took little bit of time to think about it i realized the more i tell myself that i need that thing the more i get desperate and unconciously i am telling myself that i don't have it,i don't know how much you will get it but i think it is the most important realization that we need...how and why? i don't know but i know this thinking means something :-@bhi
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मै मुसिबतों के साथ लढते लढते उनका दोस्त बन गया तुम देते रह गए लोगो की मिसाले,मै खुदमें एक मिसाल बन गया आँधियों कि ताकद में,मेरि तरफ आयि आफत में मै गिरता गया तुम मारते रहे मेरी ओर पथ्थर,मै पथ्थरों सें रास्ता बनाता गया बारीश की मौज को छोडकर,तुम मुझपर किचड उछालते रह गए मै किचड मे रह के कमळ कि तरह खिलता गया तुम उगते सुरज को पुजते रह गए मै डुबते सुरज से सलाह लेते लेते उगता अफ्ताब बन गया तुम मेरी औकात निकालते रह गए मै अपनि औकात बनाता गया
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बेबाक बादल ये बरसे मै ठेहरा रहा हर एक बुँद समाने को समंदर कि लेहरे बडी तुफानों कि चुनोतिया खडी मै तैरता रहा पार निकल जाने को सुरज जलते जलते मुझको भि जलाता रहा मै तडपता रहा छाँव से मिलने को अकेला रहेता है चाँद तारों के बिच मैने निंद छोड दि उसका साथ निभाने को एक एक करके शख्स रुठते गए मै पुछता रहा "क्युँ?" वजह समझने को मै भागता रहा जिंदगि के साथ सिर्फ राख में मिल जाने को
मै शुन्य से सौ बन बैठा हुँ
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पश्चाताप कि आग में जल बैठा हुँ तन्हाईयों कि आँखो में उलझ बैठा हुँ शायद मै जिंदगि को समझ बैठा हूँ मै राजों को राज रखके नासमझ बन बैठा हुँ मै जिंदगि का सार कम उम्र में बता बैठा हुँ मै शुन्य से सौ बन बैठा हुँ कुछ अधुरी कहानियों को दिल में डबा बैठा हुँ बहोत से बिते पलों को स्याहि से कागज पे उतार बैठा हुँ अब आग से फरक नहि पडता, मै राख से हजारों बार जन्म ले बैठा हुँ अब डुबने से भय नहि लगता, जो अब मै समंदर पि बैठा हुँ तलवारों के घाव नहि होते मुझमे तलवारों कि धार बन बैठा हुँ दुश्मनों के तिरों को राह दिखाने वालि कमान बन बैठा हुँ जो अब सारथ्य करने के लिए श्रीकृष्ण आ गये है मै महाभारत खत्म करने वाला अर्जुन बन बैठा हुँ सालों से अंजानि राह पे चल रहा हुँ मै अंजानि राहों का अनुभवि मुसाफिर बन बैठा हुँ मै शुन्य से सौ बन बैठा हुँ मै शुन्य से सौ बन बैठा हुँ
hindi poem lost own words
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मै अपनि मर्जि से नहि गिरा था दलदल में मै अपनि मर्जि से धसता रहा इस दलदल में मै चुप रहा मुझे बचाने आयि राहों की आवाजों में मैने लढाई छोड दि बिच लढाई में मैने सांस छोड दि जानतेहुए भि की जान थोडि बाकि है मेरी जान जाने में फस गया हुँ दुनिया के झमेलों में खो गया हुँ अंजानो के मेलों में हात छुट गया है खुदका खुदसे इस भिड में परेशान हो गया हुँ खुदको धुँडते धुँडते इन गर्दिशो में चिध गया था खुदा सें चलाता है दुनिया को तो बता धुँदु मै कहा खुदको गर डौर है मेरी ये तेरे हात में जल गया हुँ सुरज में या डुब गया हुँ पाणि में शेहंशाह है नशिबो का तो बता चल पडा हुँ कहि दुर या छुट गया हुँ परछाईयों सा अंधेरो में हार गया हुँ मै ए परवरदिगार बता मुझे,क्या धुँद पाऊँगा मै खुदको खुदसे खुदा ने दि मंजुरी कहाँ अरे कब का निकल चुका है तु तुझसे गर पाना हि है फिरसे तो ले बता देता हुँ कहा मिलेंगा तु खुदसे देख ले एकबार अपनि माँ कि आँखो में मिल जाऐंग़ा खुदसे माँ कि दुवाओं में :-@bhi
life through words
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today when i was arranging my books one of my cousin came in my room,seeing me with those books he sarcasticaly asked have you ever read any of them or they are only for showoff,i smiled and calmly said no i havn't read all of them but i have read 80% of them,he again asked so what you have learned from them so far,i answered i have learned only one thing that is "never reveal what you have learned in front of a person who is not worthy of it" i don't know why but he got really angry
motivational qoutes in hindi for students
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motivational qoutes in hindi for students with pictures 1)सारि दुनिया केहति है हार मानले दिल धिरे से कह देता है एक और बार कोशिश करले* picture:- 2)जब तक किसी काम को किया नहि जाता तब तक वो काम असंभव लगता है picture:- 3)सुना है आज समंदर को बडा गुमान आया है कश्ति का रुख उधर हि मोड लो जहाँ तुफान आया है picture:- 4)ख्वाहिश भलेहि छोटिसि क्युँ ना हो लेकिन उसे पुरा करने में दिल जिद्दि सा होना चाहिए 5)जितने का मजा तब हि आता है जब सब लोग आपके हारने की राह देख रहे हो 6)हर छोटा बदलाव बडी कामयाबि का हिस्सा होता है
impact of naruto
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few days ago we had a family reunion so most of my relatives were at my home also they bring their childrens with them there were six of them not older than 7 years,all elders were chatting as always what happens when relatives comes together but kids were making so much noise so to enguage them mom told me to turn on the TV and put any cartoon so that kids will not bother them in conversation,now adays almost everyone posseses smart TV's so do we,i used wireless display to cast my mobile screen on TV and put on some episodes of NARUTO, i sat with those kids and started watching the series with them after four and half hours i realised out of six kids five of the kids are already asleep within first 25 minutes,only one of them was awake and watching the series with me i don't know why but i felt proud,i looked at him and said "you are going to heritage my wisdom" and he said "dattebayo"😅😅😁 it's not over here,i also realized i am not hearing any con...
एक तारा
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एक तारा था आस्मान में मुझे बचपन में दिखता भा,सुबह श्याम रात हर वकत,वैसे तो तारे हजार थे लेकीन इसकी चमकाहट कई ज्यादा थि,मेरे लिए वो तारा मेरा सपना था,मुझे उसे पाना था,उस वक्त उसे पाने में कोई भि मुश्किल नहिं लगति थि,करना क्या है बस उडना हि तो है उसकी तरफ,एक ना एक दिन मिल हि जाएंगा। बडा हो गया पढाई पुरी हो गई काम को लग गया,अब उस तारे से ज्यादा मिलना नहि होता,वो है वहि उसि जगह आस्मान में ठेहरा हुआ,शायद मेरा इंतजार करता हुआ वो है आज भि वहा पे,मेरा अब ज्यादा ध्यान नही जाता उस ओर,कभि काम सें छुट्टी मिल जाए तो देख लेता हुँ आस्मान में,पहलेसे थोडा दुर दिखता है,पता नहि उसकी चमक कम पड गयि है या मेरी नजर धुँडलि पड गयि है,सुकुन इतने से हि मिल जाता है की वो दिखता है...... मायुस सा थका हुआ रोज की तरह काम पें निकल गया,सुबह कि दोपहर हो गई दोपहर की श्याम होने को आई बस्स अब ओर नहि मन बगावत कर उठा अब बस्स इस्तिफा लिख के सिधा बॉस के हात में दे दिया और निकल पडा,गाडी अस्सि नब्बे की स्पिड से गाडी चल पडी,सिग्नल पे रेड लाईट दिखा मै रुक गया सोच में पड गया "नोकरी छोडके मैने कोई गलति तो नहि कि?"तभि आँ...
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मंजिल कि बात मैने कि ही नहि मै रास्तों में ही खुश रहा मैने किसी और कि परवाह कि ही नहि मै अपनि हि धुण में मस्त रहा मैने गलत कोण है इसकी चिंता कि ही नहि मै घायलों के जख्मों पें मलहम लगाता रहा मंजिल ने मेरी इबादत कि ही नहि मै रास्तों से दुवाएं लेता रहा मुझे जो सहि लगा मै उस पथ पे चलता रहा मैने सच छुपाने कि कोशिश कि ही नहि मै झुठ से मुँह फेरता रहा मैने जिंदगि को किसि और के हात में दिया ही नहि मैं खुदसे लिखे शब्दों में जिंदगि को सुलझाता रहा मैं चंद शब्दों में जिंदगि को बेहलाता रहा मैं चंद शब्दों में जिंदगि को बेहलाता रहा
बात कडवि हो पर सच्चि हो एसि बात मैने सुनि नही
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बात कडवि हो पर सच्चि हो एसि बात मैने सुनि नही बात झुठ हो पर पसंद आए एसी बात मैने बोलि नही वचन दुँ पर पुरा ना हो एसा वचन मैने दिया नही कोई वचन दें और पुरा हो एसा वचन मुझे मिला नही अधे रास्ते हात छोड दुँ एसा साथ मैने दिया नही मंजिल तक साथ हो एसा हात मुझे मिला नही बाहर से सुंदर ना हो,अंदर से निरागस हो एसि सुंदरता मैने देखि नही बाहर से सुंदर,भितर से मलिन हो एसि सुंदरता मैने जानि नही पैसा बहोत है पर लोग इज्जत ना दें एसि अमिरी मैने देखि नही दिल साफ हों पर इज्जत ना दुँ एसि गरीबि मैने जानि नही खुदा पे उंगलि उठाई है पर माँगा कुछ भि ना हो एसा मैने कभि किया नही मेरे काबिल हो और उसने दिया ना हो एसा कभि हुआ नही
बात ये जान ले
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बात ये जान ले हर बार लढाई में जित नही होति एक दिन में बनने वालि इमारत ताजमहेल नही होति एक रात में आयि शोहरत दिख जाति है कुर्बान हुई सौ रातों की बात नही होति जित में सबका हिस्सा आता है ये दुनिया हार में साथ नही होति इंसान का अस्तित्त्व मिट जाता है बात ये जान ले विचारों कि कभि मौत नही होति सुरज दिन में कितना भि जल लें सुरज कि कभि रात नही होति तखलिफ कितनि भि हो बात अपनो कि हो तो नाराजगि नही होति तु मंजर पर आँसु कितने भि बहाले पर जमानें में जज्बातो कि कदर नही होति कभि कबार भिड का हिस्सा बनना पडता है क्युँकि हर बार कहानि तुझपे नही होति खुदका कंधा मजबुत रखना पडता है ये मत समझ किसी ओर को कंधे कि जरुरत नही होति जिंदगि इस गलतफेहमि में मत जि कि जिंदगि के बाद मौत नही होति
"अब हम सुधर रहे है"
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बहोतों कें नकाब अब उतर रहे है जो अब हम सुधर रहे है बुरी आदतों पें झुठमुठ का गुस्सा लाजमि था मेरी अच्छि आदतों पे अब जल रहे है बहोतों कें नकाब उतर रहे है उनकी सच्चाई आयने में दिखाई तो मेरी सच्चाई पे सवाल उठ रहे है आँखो की धुल खुदसे झटकी तब देखा धुल फेकने वाले गुस्सा हो रहे है मेरे खिलाफ ही तुफानों के मेले लग रहे है नकाब पेहनने वाले एक साथ दिख रहे है मुझे बार बार गिरा रहे है मै हर बार गिरने के बाद उठ रहां हुँ इस बात पे खफा हो रहे है वो बेइज्जती करें, मै फिर भि हस रहा हुँ इस बात से वो चिध रहे है किसिने पुछा इतनि उंगलिया उठ रही है फिर भि आप जवाब क्युँ नही दे रहे है जवाब में मैने ये केह दिया "अब हम सुधर रहे है"
तु नदि सि मुडति है मै समंदर सा थम जाता हुँ
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तेरी यादों की बारिशो में मै आग हो के भि भिग जाता हुँ तेरी ओर जाने वालि राहो में मै पथ्थर हो के भि ठोकर खाता हुँ तु नदि सि मुडति है मै समंदर सा थम जाता हुँ तेरी आँखो कि गेहराईयों में मै पाणि हो के भि डुब जाता हुँ तेरी मौजुदगि में मै वक्त हो के भि रुक जाता हुँ तेरी नामौजुदगि में मै हर लम्हे में तुझको पाता हुँ तेरी नाराजगि में मै खुदपे गुस्सा हो जाता हुँ तेरी यादों में मै ख़ुदको भुल जाता हुँ तु नदि सि मुडति है मै समंदर सा थम जाता हुँ
वो खुदमे खोया रहता है
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वो खुदमे खोया रहता है कभि असमान कभि जमिन वो देखता रहता है वो खुदमे खोया रहता है बारीशो की एक दो बुँदे हाथेलि पे डाल भि लेता है कोई अपणा दिख जाये तो कभि कबार थोडा हंस भि देता है वो ज्यादातर खुदमे ही खोया रहता है कोई पुछे कैसे हो तो थोडा मुस्कुरा देता है वो खुदमे ही खोया रहता है दर्द ये दिल का दबाता है आँसु ये आँखो का रुकाता है कोई प्यार दिखाए तो सिमट जाता है प्यार जताने में कम पड जाता है वो खुदमे ही खोया रहता है भिड से वो डर जाता है अकेला हो तो ही चेहरें पे नुर आता है वो थोडीसि मुस्कुराहट में बहोत कुछ छुपाता है वो आँखो से बहोत कुछ बतलाता है वो खामोशि को शब्द देता है वो खामोशि को समझता है वो खुदमे ही खोया रहता है abhigajare007.blogspot.com
वक्त का और मेरा ज्यादा जमता ही नही
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वक्त का और मेरा ज्यादा जमता ही नही वो कभि मेंरे साथ रेहता ही नही वो दौड में कभि आगे बढ जाता है तो कभि पिछे पड जाता है साथ में आ जाए तो खफा हो जाता है मुझे वक्त को मनाना आता ही नही वक्त का और मेरा ज्यादा जमता ही नही मुझसे आगे रेहने दुँ तो मुझपे हसता जाता है उसे पिछे छोड दुँ तो नाराज हो जाता है साथ मे रखने कि कोशिश करु तो बेवफा हो जाता है वक्त का और मेरा ज्यादा जमता ही नही मुझे वक्त को मनाना आता ही नही abhigajare007.blogspot.com
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कुछ पल है उन्हे भुलना चाहता हुँ कुछ पहेलियाँ है सुलझाना चाहता हुँ कुछ मंजिलों को मिलने से पहले राहों में भटकना चाहता हुँ कुछ आवाजे है सुनना चाहता हुँ कुछ शब्द है बोलना चाहता हुँ कुछ रुठों को फिरसे अपनाना चाहता हुँ कुछ पन्ने है किताब के फिर से लिखना चाहता हुँ कुछ रुसवे है तकदिर के उन्हे बदलना चाहता हुँ कुछ नाराज है उन्हे समझना चाहता हुँ कुछ काँटे चुभे है राहो में निकालना चाहता हुँ बहोत चल लिया अब थोडा रुकना चाहता हुँ
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hindi shayari:-own words आँखो में आँखे थि हातों में हात तेरा तु ही तो बनके आई थि मेरा वो सवेरा बात एक होंठो पे दबाए थे वो राज चुपके से आँखो से बताई थि वो बात दुरी से हो जाति थि तुम जो वो नाराज पास होके भि क्युँ हो आज उदास क्युँ रुठा है आज तेरे चेहरे का ये साज है कोनसि वो बात जो मन ही मन है चुभति होंठो पे आने से क्युँ है वो डरति पास होंके भि क्युँ ना हम ये साथ है तुम साथ होंके भि क्युँ ना ये दिल पास है बतला भि दों क्या है मन मै ये रंजिश प्यार है या बेवफाई क्यां है तेरी साजिश कर रहा है ये दिल जिने की कोशिश केह रंहा है ये दिल मिलने कि ख्वाहीश हो रही है प्यार की आज आजमाईश abhigajare007.blogspot.com
हातो की लकीरे खुबसुरत थि मुठ्ठि बननेसे रह गयि
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हातो की लकीरे खुबसुरत थि मुठ्ठि बननेसे रह गयि दिल में नदि थि आँसु बनने से रंह गयि दुवाए बहोत थि रेहमत बनने से रह गयि जुबान पे अल्फाज लाखो थे आवांज बनने से रह गयि सपने बहोत थे हकिकत बनने से रह गयि इंसान बहोत थे इंसानियत बनने से रह गयि मुर्तिया बहोत थि भगवान बनने से रह गयि मौत आ गयि थि तब सोचा अरे जिंदगि जिने से रह गयि
एक युवा
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ना गांधि चाहीए ना नेहरु चाहीए हमें भगत सिंग की विचारों की लेहरे चाहीए तेईस की उम्र में फाँसि पे चढने का जज्बा चाहीए टिळक की पुर्ण स्वराज वालि प्रतिमा चाहीए आई भवानि की हात में तलवार चाहीए भगवान के रुप मे छत्रपति चाहीए हर लडकी के अंदर झाँसि वालि राणि चाहीए था नथुराम गलत मगर उसके जैसि देशभक्ति चाहीए वि.दा.सावरकर जैसि संयम और सहनशिलता चाहीए 1857 की वो शुरुवात चाहीए मंगल पांडे जैसा स्वाभिमान चाहीए 2019 में हमें आतंक खत्म चाहीए उन्होंने सिर्फ हात उगारा है अब पाकिस्तान के दोनो गालों पें चमाट चाहीए बस अब हमें आतंक खत्म चाहीए इतिहास में ये दर्ज चाहीए आतंक पे आगाज भारत का चाहीए हमें भारतके पाँव के निचे आतंक दबा हुआ चाहीए abhigajare007.blogspot.com
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मै हर रात रोशनि को अंधेरो में धुँडता हुँ मै दिया बुझने के बाद आँखे खोलता हुँ मै हर एक पल सपनों में जिता हुँ मै पल पल सपनों में मरता हुँ हर एक दास्तां मेरी अधुरी रहति है मै तुकडो में खुशि धुँडता हुँ मै शख्स हुँ एसा जो ठुकराने के बाद भि साथ धुँडता हुँ ना मर्ज से ना दवा से मै जख्मो से प्यार करता हुँ मुझे ताने इस बात पे मिलते है की मै तुटने के बाद चिजें जोडता हुँ कई बार मुझसे अपने रुठ जाते है कहते है मै चिजों को जोडने के बाद उन्हे थोडा ज्यादा ही संभालता हुँ मै शख्स हुँ एसा जो ठुकराने के बाद भि साथ धुँडता हुँ abhigajare007.blogspot.com
हम लडको को भि रोना आता है
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hindi shayari:-हम लडको को भि रोना आता है हम में भि आँसु होता है हम लडको को भि रोना आता है माँ कि आँखो का आँसु देखकर दर्द हमें भि होता है बाप को हुई तखलिफ से रोना हमें भि आता है बेहन की बिदाई के वक्त हमे थोडा हसना पडता है चुपके से जाके जमाने से छुपके हमें रोना पडता है कही कोई देख ना लें इसलिए जल्दि से आँसु पोछना पडता है कुछ परिस्थितियों में हमें पथ्थर दिल होना पडता है हम में भि आँसु होता है हम लडको को भि रोना आता है दिल पे लगि चोट को छुपाना बखुबि आता है तुमसे कभि प्यार ही नही था, ना चाहते हुए भि ये झुठ बोलना पडता है ब्रेकअप के बाद,तुम मुझे भुल सकोंगे? इस सवाल पे गुस्सा कम रोना ज्यादा आता है तुम्हारे बगैर खुश रहुँगा,दिल पर पथ्थर रख के ये बोलना पडता है हम लडको को भि रोना आता है दिल से निकला हुआ आँसु तुम्हारे जाने के बाद ही आँखो में लाना पडता है कही कोई देख ना लें इसलिए जल्दि से आँसु पोछना पडता है हम में भि आँसु होता है हम लडको को भि रोना आता है
निंद लग रही थी,सपने जगा रहे थे
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hindi shayri:-निंद लग रही थी,सपने जगा रहे थे निंद लग रही थी,सपने जगा रहे थे रातें ढल रही थी,दिन इंतजार कर रहे थे तुम शरमा रहीं थी,आँखो से इशारे हो रहे थे तुम मुस्कुरा रहीं थी,दिल पे वार हो रहे थे कविताओं की मैहफिल सजी थी,कविताओं में आशिक आ रहे थे बातें वफाई की हो रंही थी,नाम बेवफाओं के लिए जा रहे थे बात इश्क की हो रही थी,जुबान पे हीर रांझा और लैला मजनु आ रहे थे जुल्फे सँवारि जा रही थी,जब मैहफिल मे हमारे कदम आ रहे थे मैने खामोशि सुनि थी,जब मैहफिल में मेरे शब्द आ रहे थे चुडीयों की खणखणाहट आई थी,हजारों के बिच एक तेरी टाली बजी थी हलकीसी वाह सुनि थी,जब मेरी नजर तेरे ओंठो पे गढी थी also check out bollywood related article here क्या आपने देखे रणविर और दिपिका के शादि के फोटो? sara ali khan wants to date kartik aryan and marry ranbir kapoor also check out these poems and shayari's(आप और भि अच्छि कविताए और शायरीया निचे दिये हुए links पर देख सकते है) रास्ता है तो मंजिल होंगी मै झुकता नही मै झुकाता हुँ कयुं मे तुझपे ही आके थम जाता हुँ वो शोहरतों के मुकाम...