हातो की लकीरे खुबसुरत थि मुठ्ठि बननेसे रह गयि

हातो की लकीरे खुबसुरत थि
मुठ्ठि बननेसे रह गयि

दिल में नदि थि
आँसु बनने से रंह गयि

दुवाए बहोत थि
रेहमत बनने से रह गयि

जुबान पे अल्फाज लाखो थे
आवांज बनने से रह गयि

सपने बहोत थे
हकिकत बनने से रह गयि

इंसान बहोत थे
इंसानियत बनने से रह गयि

मुर्तिया बहोत थि
भगवान बनने से रह गयि

मौत आ गयि थि तब सोचा
अरे जिंदगि जिने से रह गयि


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