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Showing posts from August, 2019
जिन्दा हुँ अब तक ये सबुत है कि कमजोर नहि हुँ मै जमाने से डरा नहि हुँ खुदसे डर गया हुँ मै जिंदगि में कुछ हिस्से थे अपने आज बस उनके किस्सो में याद हुँ मै अंजान नहि मै खुदसे खुदकी नजर में आज़र्दाह अजनबि हुँ मै अहिस्ता आह भर लेता हुँ मै मै अफसानानविस अफसाना हर एक अधुरा छोड देता हुँ मै :-@bhi
मैफिले जिसके नफरतो की लगी थि,मै उसकि तारीफ कर बैठा जिसके खिलाफ शिकायते आ रहि थि,मै उसकि खासियते बोल बैठा उसके दुश्मनो के इलाके में,मै उसको अपना दोस्त बता बैठा जख्म जिससे आए,मै उसीके हात में नमक दे बैठा जो बात याद रखनि थि,मै बस वहि बात भुल बैठा जिसके खिलाफ जाने की साजिशे हो रहि थि,मै उसका हि साथ दे बैठा बात जिसे मारने कि हो रहि थि,मै उसि को बचा बैठा जो नहि करना था,मै नादान वहि कर बैठा :-@bhi