जिन्दा हुँ अब तक ये सबुत है कि कमजोर नहि हुँ मै जमाने से डरा नहि हुँ खुदसे डर गया हुँ मै जिंदगि में कुछ हिस्से थे अपने आज बस उनके किस्सो में याद हुँ मै अंजान नहि मै खुदसे खुदकी नजर में आज़र्दाह अजनबि हुँ मै अहिस्ता आह भर लेता हुँ मै मै अफसानानविस अफसाना हर एक अधुरा छोड देता हुँ मै :-@bhi
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मैफिले जिसके नफरतो की लगी थि,मै उसकि तारीफ कर बैठा जिसके खिलाफ शिकायते आ रहि थि,मै उसकि खासियते बोल बैठा उसके दुश्मनो के इलाके में,मै उसको अपना दोस्त बता बैठा जख्म जिससे आए,मै उसीके हात में नमक दे बैठा जो बात याद रखनि थि,मै बस वहि बात भुल बैठा जिसके खिलाफ जाने की साजिशे हो रहि थि,मै उसका हि साथ दे बैठा बात जिसे मारने कि हो रहि थि,मै उसि को बचा बैठा जो नहि करना था,मै नादान वहि कर बैठा :-@bhi