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Showing posts from October, 2019
हा मै काल हुँ आँखो से आँखो तक कि मजाल हुँ हा मै काल हुँ कृष्ण के अंगुठे के पार मै वो बाण हुँ मै काल हुँ कृष्ण का चक्र मै मौजुद हर एक अस्त्र मै शिशुपाल के सौ पांपो का घडा मै महाभारत के पल पल मे खडा मै हा मै काल हुँ आँखो से आँखो तक कि मजाल हुँ मै काल हुँ भिष्म का वचन मै मै द्रोपदि का हरन हुँ लोगो का कर्म मै मै कर्मो का उत्तर हुँ मै काल हुँ हा मै काल हुँ शब्दो का जाल हुँ अभिमन्यु का हाल हुँ युधिष्ठिर का झुठ मै पुण्य से अछुत हुँ गिता का अर्थ मै गिता सुनने वाला पार्थ मै विश्वरुप में से एक हुँ मै काल शोर चुपचाप हुँ हा मै काल हुँ विदुर के शब्द मै दुर्योधन कि बुध्दि हुँ चिरहरन मे दुशासन के हात मै मै एक अकेला आवाज विकर्ण हुँ मै काल हुँ गांडिव का तिर मै रथ पे सवार विर मै पाण्डवो का धिर हुँ मै कौरवों पे समशिर हुँ सर्वश्रेष्ठ धर्नुधर मै दलदल मे फसा हुआ चक्र हुँ मै काल मै शोर चुपचाप हुँ