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Showing posts from March, 2019

बात ये जान ले

बात ये जान ले हर बार लढाई में जित नही होति एक दिन में बनने वालि इमारत ताजमहेल नही होति एक रात में आयि शोहरत दिख जाति है कुर्बान हुई सौ रातों की बात नही होति जित में सबका हिस्सा आता है ये दुनिया हार में साथ नही होति इंसान का अस्तित्त्व मिट जाता है बात ये जान ले विचारों कि कभि मौत नही होति सुरज दिन में कितना भि जल लें सुरज कि कभि रात नही होति तखलिफ कितनि भि हो बात अपनो कि हो तो नाराजगि नही होति तु मंजर पर आँसु कितने भि बहाले पर जमानें में जज्बातो कि कदर नही होति कभि कबार भिड का हिस्सा बनना पडता है क्युँकि हर बार कहानि तुझपे नही होति खुदका कंधा मजबुत रखना पडता है ये मत समझ किसी ओर को कंधे कि जरुरत नही होति जिंदगि इस गलतफेहमि में मत जि कि जिंदगि के बाद मौत नही होति

"अब हम सुधर रहे है"

बहोतों कें नकाब अब उतर रहे है जो अब हम सुधर रहे है बुरी आदतों पें झुठमुठ का गुस्सा लाजमि था मेरी अच्छि आदतों पे अब जल रहे है बहोतों कें नकाब उतर रहे है उनकी सच्चाई आयने में दिखाई तो मेरी सच्चाई पे सवाल उठ रहे है आँखो की धुल खुदसे झटकी तब देखा धुल फेकने वाले गुस्सा हो रहे है मेरे खिलाफ ही तुफानों के मेले लग रहे है नकाब पेहनने वाले एक साथ दिख रहे है मुझे बार बार गिरा रहे है मै हर बार गिरने के बाद उठ रहां हुँ इस बात पे खफा हो रहे है वो बेइज्जती करें, मै फिर भि हस रहा हुँ इस बात से वो चिध रहे है किसिने पुछा इतनि उंगलिया उठ रही है फिर भि आप जवाब क्युँ नही दे रहे है जवाब में मैने ये केह दिया "अब हम सुधर रहे है"

तु नदि सि मुडति है मै समंदर सा थम जाता हुँ

तेरी यादों की बारिशो में मै आग हो के भि भिग जाता हुँ तेरी ओर जाने वालि राहो में मै पथ्थर हो के भि ठोकर खाता हुँ तु नदि सि मुडति है मै समंदर सा थम जाता हुँ तेरी आँखो कि गेहराईयों में मै पाणि हो के भि डुब जाता हुँ तेरी मौजुदगि में मै वक्त हो के भि रुक जाता हुँ तेरी नामौजुदगि में मै हर लम्हे में तुझको पाता हुँ तेरी नाराजगि में मै खुदपे गुस्सा हो जाता हुँ तेरी यादों में मै ख़ुदको भुल जाता हुँ तु नदि सि मुडति है मै समंदर सा थम जाता हुँ

वो खुदमे खोया रहता है

वो खुदमे खोया रहता है  कभि असमान कभि जमिन वो देखता रहता है वो खुदमे खोया रहता है  बारीशो की एक दो बुँदे हाथेलि पे डाल भि लेता है कोई अपणा दिख जाये तो कभि कबार थोडा हंस भि देता है वो ज्यादातर खुदमे ही खोया रहता है कोई पुछे कैसे हो तो थोडा मुस्कुरा देता है वो खुदमे ही खोया रहता है दर्द ये दिल का दबाता है आँसु ये आँखो का रुकाता है कोई प्यार दिखाए तो सिमट जाता है प्यार जताने में कम पड जाता है वो खुदमे ही खोया रहता है भिड से वो डर जाता है अकेला हो तो ही चेहरें पे नुर आता है वो थोडीसि मुस्कुराहट में बहोत कुछ छुपाता है वो आँखो से बहोत कुछ बतलाता है वो खामोशि को शब्द देता है वो खामोशि को समझता है वो खुदमे ही खोया रहता है abhigajare007.blogspot.com

वक्त का और मेरा ज्यादा जमता ही नही

वक्त का और मेरा ज्यादा जमता ही नही वो कभि मेंरे साथ रेहता ही नही वो दौड में कभि आगे बढ जाता है तो कभि पिछे पड जाता है साथ में आ जाए तो खफा हो जाता है मुझे वक्त को मनाना आता ही नही वक्त का और मेरा ज्यादा जमता ही नही मुझसे आगे रेहने दुँ तो मुझपे हसता जाता है उसे पिछे छोड दुँ तो नाराज हो जाता है साथ मे रखने कि कोशिश करु तो बेवफा हो जाता है वक्त का और मेरा ज्यादा जमता ही नही मुझे वक्त को मनाना आता ही नही abhigajare007.blogspot.com
कुछ पल है उन्हे भुलना चाहता हुँ कुछ पहेलियाँ है सुलझाना चाहता हुँ कुछ मंजिलों को मिलने से पहले राहों में भटकना चाहता हुँ कुछ आवाजे है सुनना चाहता हुँ कुछ शब्द है बोलना चाहता हुँ कुछ रुठों को फिरसे अपनाना चाहता हुँ कुछ पन्ने  है किताब के फिर से लिखना चाहता हुँ कुछ रुसवे है तकदिर के उन्हे बदलना चाहता हुँ कुछ नाराज है उन्हे समझना चाहता हुँ कुछ काँटे चुभे है राहो में निकालना चाहता हुँ बहोत चल लिया अब थोडा रुकना चाहता हुँ
hindi shayari:-own words आँखो में आँखे थि हातों में हात तेरा तु ही तो बनके आई थि मेरा वो सवेरा बात एक होंठो पे दबाए थे वो राज चुपके से आँखो से बताई थि वो बात दुरी से हो जाति थि तुम जो वो नाराज पास होके भि क्युँ हो आज उदास क्युँ रुठा है आज तेरे चेहरे का ये साज है कोनसि वो बात जो मन ही मन है चुभति होंठो पे आने से क्युँ है वो डरति पास होंके भि क्युँ ना हम ये साथ है तुम साथ होंके भि क्युँ ना ये दिल पास है बतला भि दों क्या है मन मै ये रंजिश प्यार है या बेवफाई क्यां है तेरी साजिश कर रहा है ये दिल जिने की कोशिश केह रंहा है ये दिल मिलने कि ख्वाहीश हो रही है प्यार की आज आजमाईश abhigajare007.blogspot.com