वो खुदमे खोया रहता है

वो खुदमे खोया रहता है 
कभि असमान कभि जमिन वो देखता रहता है
वो खुदमे खोया रहता है 
बारीशो की एक दो बुँदे हाथेलि पे डाल भि लेता है
कोई अपणा दिख जाये तो कभि कबार थोडा हंस भि देता है
वो ज्यादातर खुदमे ही खोया रहता है
कोई पुछे कैसे हो तो थोडा मुस्कुरा देता है
वो खुदमे ही खोया रहता है
दर्द ये दिल का दबाता है
आँसु ये आँखो का रुकाता है
कोई प्यार दिखाए तो सिमट जाता है
प्यार जताने में कम पड जाता है
वो खुदमे ही खोया रहता है
भिड से वो डर जाता है
अकेला हो तो ही चेहरें पे नुर आता है
वो थोडीसि मुस्कुराहट में बहोत कुछ छुपाता है
वो आँखो से बहोत कुछ बतलाता है
वो खामोशि को शब्द देता है
वो खामोशि को समझता है
वो खुदमे ही खोया रहता है
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