बात ये जान ले

बात ये जान ले
हर बार लढाई में जित नही होति
एक दिन में बनने वालि इमारत
ताजमहेल नही होति

एक रात में आयि शोहरत दिख जाति है
कुर्बान हुई सौ रातों की बात नही होति

जित में सबका हिस्सा आता है
ये दुनिया हार में साथ नही होति

इंसान का अस्तित्त्व मिट जाता है
बात ये जान ले
विचारों कि कभि मौत नही होति

सुरज दिन में कितना भि जल लें
सुरज कि कभि रात नही होति

तखलिफ कितनि भि हो
बात अपनो कि हो तो नाराजगि नही होति

तु मंजर पर आँसु कितने भि बहाले पर
जमानें में जज्बातो कि कदर नही होति

कभि कबार भिड का हिस्सा बनना पडता है
क्युँकि हर बार कहानि तुझपे नही होति

खुदका कंधा मजबुत रखना पडता है
ये मत समझ
किसी ओर को कंधे कि जरुरत नही होति

जिंदगि इस गलतफेहमि में मत जि
कि जिंदगि के बाद मौत नही होति

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