जिन्दा हुँ अब तक
ये सबुत है कि कमजोर नहि हुँ मै
जमाने से डरा नहि हुँ
खुदसे डर गया हुँ मै
जिंदगि में कुछ हिस्से थे अपने
आज बस उनके किस्सो में याद हुँ मै
अंजान नहि मै खुदसे
खुदकी नजर में आज़र्दाह अजनबि हुँ मै
अहिस्ता आह भर लेता हुँ मै
मै अफसानानविस अफसाना हर एक अधुरा छोड देता हुँ मै
:-@bhi
ये सबुत है कि कमजोर नहि हुँ मै
जमाने से डरा नहि हुँ
खुदसे डर गया हुँ मै
जिंदगि में कुछ हिस्से थे अपने
आज बस उनके किस्सो में याद हुँ मै
अंजान नहि मै खुदसे
खुदकी नजर में आज़र्दाह अजनबि हुँ मै
अहिस्ता आह भर लेता हुँ मै
मै अफसानानविस अफसाना हर एक अधुरा छोड देता हुँ मै
:-@bhi
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