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Showing posts from February, 2019

हातो की लकीरे खुबसुरत थि मुठ्ठि बननेसे रह गयि

हातो की लकीरे खुबसुरत थि मुठ्ठि बननेसे रह गयि दिल में नदि थि आँसु बनने से रंह गयि दुवाए बहोत थि रेहमत बनने से रह गयि जुबान पे अल्फाज लाखो थे आवांज बनने से रह गयि सपने बहोत थे हकिकत बनने से रह गयि इंसान बहोत थे इंसानियत बनने से रह गयि मुर्तिया बहोत थि भगवान बनने से रह गयि मौत आ गयि थि तब सोचा अरे जिंदगि जिने से रह गयि

एक युवा

ना गांधि चाहीए ना नेहरु चाहीए हमें भगत सिंग की विचारों की लेहरे चाहीए तेईस की उम्र में फाँसि पे चढने का जज्बा चाहीए टिळक की पुर्ण स्वराज वालि प्रतिमा चाहीए आई भवानि की हात में तलवार चाहीए भगवान के रुप मे छत्रपति चाहीए हर लडकी के अंदर झाँसि वालि राणि चाहीए था नथुराम गलत मगर उसके जैसि देशभक्ति चाहीए वि.दा.सावरकर जैसि संयम और सहनशिलता चाहीए 1857 की वो शुरुवात चाहीए मंगल पांडे जैसा स्वाभिमान चाहीए 2019 में हमें आतंक खत्म चाहीए उन्होंने सिर्फ हात उगारा है अब पाकिस्तान के दोनो गालों पें चमाट चाहीए बस अब हमें आतंक खत्म चाहीए इतिहास में ये दर्ज चाहीए आतंक पे आगाज भारत का चाहीए हमें भारतके पाँव के निचे आतंक दबा हुआ चाहीए abhigajare007.blogspot.com
मै हर रात रोशनि को अंधेरो में धुँडता हुँ मै दिया बुझने के बाद आँखे खोलता हुँ मै हर एक पल सपनों में जिता हुँ मै पल पल सपनों में मरता हुँ हर एक दास्तां मेरी अधुरी रहति है मै तुकडो में खुशि धुँडता हुँ मै शख्स हुँ एसा जो ठुकराने के बाद भि साथ धुँडता हुँ ना मर्ज से ना दवा से मै जख्मो से प्यार करता हुँ मुझे ताने इस बात पे मिलते है की मै तुटने के बाद चिजें जोडता हुँ कई बार मुझसे अपने रुठ जाते है कहते है मै चिजों को जोडने के बाद उन्हे थोडा ज्यादा ही संभालता हुँ मै शख्स हुँ एसा जो ठुकराने के बाद भि साथ धुँडता हुँ abhigajare007.blogspot.com