मै हर रात रोशनि को अंधेरो में धुँडता हुँ
मै दिया बुझने के बाद आँखे खोलता हुँ
मै हर एक पल सपनों में जिता हुँ
मै पल पल सपनों में मरता हुँ
हर एक दास्तां मेरी अधुरी रहति है
मै तुकडो में खुशि धुँडता हुँ
मै शख्स हुँ एसा जो ठुकराने के बाद भि साथ धुँडता हुँ
ना मर्ज से ना दवा से मै जख्मो से प्यार करता हुँ
मुझे ताने इस बात पे मिलते है की
मै तुटने के बाद चिजें जोडता हुँ
कई बार मुझसे अपने रुठ जाते है कहते है
मै चिजों को जोडने के बाद उन्हे थोडा ज्यादा ही संभालता हुँ
मै शख्स हुँ एसा जो ठुकराने के बाद भि साथ धुँडता हुँ
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