हा मै काल हुँ आँखो से आँखो तक कि मजाल हुँ हा मै काल हुँ कृष्ण के अंगुठे के पार मै वो बाण हुँ मै काल हुँ कृष्ण का चक्र मै मौजुद हर एक अस्त्र मै शिशुपाल के सौ पांपो का घडा मै महाभारत के पल पल मे खडा मै हा मै काल हुँ आँखो से आँखो तक कि मजाल हुँ मै काल हुँ भिष्म का वचन मै मै द्रोपदि का हरन हुँ लोगो का कर्म मै मै कर्मो का उत्तर हुँ मै काल हुँ हा मै काल हुँ शब्दो का जाल हुँ अभिमन्यु का हाल हुँ युधिष्ठिर का झुठ मै पुण्य से अछुत हुँ गिता का अर्थ मै गिता सुनने वाला पार्थ मै विश्वरुप में से एक हुँ मै काल शोर चुपचाप हुँ हा मै काल हुँ विदुर के शब्द मै दुर्योधन कि बुध्दि हुँ चिरहरन मे दुशासन के हात मै मै एक अकेला आवाज विकर्ण हुँ मै काल हुँ गांडिव का तिर मै रथ पे सवार विर मै पाण्डवो का धिर हुँ मै कौरवों पे समशिर हुँ सर्वश्रेष्ठ धर्नुधर मै दलदल मे फसा हुआ चक्र हुँ मै काल मै शोर चुपचाप हुँ
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ये कैसि तेरि जालिम मेरी तुझपे मोहब्बत है पल पल बस तबाह किए जाति है इस उडते धुवे के साथ हर एक याँद मिटाति जाति है बाहर से खुद भि जलति जाति है अंदर से मुझे जलाति जाति है इश्क मुझसे करति भि नहि नफरत तुझसे होने भि नहि देति है तु पुरी जल जाति है,मुझे बचाकुचा पुरा जलाने के लिए फिरसे पहले सिरे से जलना शुरु हो जाति है
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अफवाओं में "मै" अलग अलग मुझे बहोत बार आया सुनने को मै ठेहरा रहा बरसों तक असलि "मै" बताने को हजार आवाजे थि मुझे मेरी मंजिल बताने को मै चलता रहा बरसों तक मेरी खुदकी आवाज सुनने को सौ याँदे थि मुझे पिछे कल में ले जाने को मै आगे कल कि ओर बढता रहा एक दों वादें निभाने को मेरी जंग नहि थि फिर भि लढता रहा दिए हुए वादों का साथ देने को मै लढता रहा ये जानते हुए भि कि साथि तयार है बिच लढाई में मेरा साथ छोड जाने को :-@bhi
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हार से पार हुँ मै जित का त्योंहार हुँ मुश्किलो से क्युँ डरुँ उनका तो मै यार हुँ शोहरतों का वार हुँ मै जिल्लतो का प्यार हुँ तकदिर से खाई हुई मार हुँ अफताब मै उगने के लिए तयार हुँ कलियुग का अवतार हूँ मै खुदसे आई पुकार हुँ बुराई में दरार हुँ मै अच्छाई की दरकार हुँ प्यार का इजहार हुँ मै विश्वास का इकरार हुँ वफाई कि दिवार हुँ मै बेवफाई पे धिक्कार हुँ तुफानो में कश्तियो कि पतवार हुँ तेरी सलामति पे जान निसार हुँ जिंदगि का तेरी पहरेदार हुँ मै हार से पार हुँ :-@bhi
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मैफिले जिसके नफरतो की लगी थि,मै उसकि तारीफ कर बैठा जिसके खिलाफ शिकायते आ रहि थि,मै उसकि खासियते बोल बैठा उसके दुश्मनो के इलाके में,मै उसको अपना दोस्त बता बैठा जख्म जिससे आए,मै उसीके हात में नमक दे बैठा जो बात याद रखनि थि,मै बस वहि बात भुल बैठा जिसके खिलाफ जाने की साजिशे हो रहि थि,मै उसका हि साथ दे बैठा बात जिसे मारने कि हो रहि थि,मै उसि को बचा बैठा जो नहि करना था,मै नादान वहि कर बैठा :-@bhi
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ना राहि,ना राह,ना मंजिल ना उसकि चाह मै अकेला हुँ अकेला हि रेहना पसंद करता हुँ मै सुरज हुआ तो दिन में हि निकलना पसंद करता हुँ मै रात के अंधेरे में अकेला चाँद होना पसंद करता हुँ बात एसि नहि कि तुम मुझे बुरा समझते हो, अच्छा है तुम वो समझते हो, मै बुरा समझा जाऊँ,मै वहि पसंद करता हुँ बहोत बार सुना है मै समझता नहि कुछ, तुम मुझे नासमझ समझो सच बताता हुँ,मै नासमझ समझ जाना हि पसंद करता हुँ :-@bhi