एक तारा
एक तारा था आस्मान में मुझे बचपन में दिखता भा,सुबह श्याम रात हर वकत,वैसे तो तारे हजार थे लेकीन इसकी चमकाहट कई ज्यादा थि,मेरे लिए वो तारा मेरा सपना था,मुझे उसे पाना था,उस वक्त उसे पाने में कोई भि मुश्किल नहिं लगति थि,करना क्या है बस उडना हि तो है उसकी तरफ,एक ना एक दिन मिल हि जाएंगा।
बडा हो गया पढाई पुरी हो गई काम को लग गया,अब उस तारे से ज्यादा मिलना नहि होता,वो है वहि उसि जगह आस्मान में ठेहरा हुआ,शायद मेरा इंतजार करता हुआ वो है आज भि वहा पे,मेरा अब ज्यादा ध्यान नही जाता उस ओर,कभि काम सें छुट्टी मिल जाए तो देख लेता हुँ आस्मान में,पहलेसे थोडा दुर दिखता है,पता नहि उसकी चमक कम पड गयि है या मेरी नजर धुँडलि पड गयि है,सुकुन इतने से हि मिल जाता है की वो दिखता है......
मायुस सा थका हुआ रोज की तरह काम पें निकल गया,सुबह कि दोपहर हो गई दोपहर की श्याम होने को आई बस्स अब ओर नहि मन बगावत कर उठा अब बस्स इस्तिफा लिख के सिधा बॉस के हात में दे दिया और निकल पडा,गाडी अस्सि नब्बे की स्पिड से गाडी चल पडी,सिग्नल पे रेड लाईट दिखा मै रुक गया सोच में पड गया "नोकरी छोडके मैने कोई गलति तो नहि कि?"तभि आँखो पे चमक पडी,मेरा हात एक दम से आँखो पे आ गया,कुछ पल आँखो पे हि रहा,वो चमक उपर से आयि,मैने आस्मान में देखा,वो तारा उसकि जगह वापस आ गया था,उस चमक पहलेसे कई ज़्यादा थि,मेरे सवाल पे वो जवाब बनके आया था,मानो वो मुझे मेरा अधुरा सपना पुरा करने के लिए फिरसे बुला रहा हो,उसको देख के चेहरे पे मुस्कुराहट आ गई मानो बरसो के बाद कोई बिछड़ा हुआ यार मिल गया हो,ग्रिन लाईट लगा और होर्न पे होर्न पडने लगे,मैने accelerator बढाया और घर की तरफ चल पड़ा,वो तारा पहलेकी तरहा अब मेरे साथ चलता है,आस्मान में देखु तो बाकी तारों से कई ज्यादा चमकता है........
बडा हो गया पढाई पुरी हो गई काम को लग गया,अब उस तारे से ज्यादा मिलना नहि होता,वो है वहि उसि जगह आस्मान में ठेहरा हुआ,शायद मेरा इंतजार करता हुआ वो है आज भि वहा पे,मेरा अब ज्यादा ध्यान नही जाता उस ओर,कभि काम सें छुट्टी मिल जाए तो देख लेता हुँ आस्मान में,पहलेसे थोडा दुर दिखता है,पता नहि उसकी चमक कम पड गयि है या मेरी नजर धुँडलि पड गयि है,सुकुन इतने से हि मिल जाता है की वो दिखता है......
मायुस सा थका हुआ रोज की तरह काम पें निकल गया,सुबह कि दोपहर हो गई दोपहर की श्याम होने को आई बस्स अब ओर नहि मन बगावत कर उठा अब बस्स इस्तिफा लिख के सिधा बॉस के हात में दे दिया और निकल पडा,गाडी अस्सि नब्बे की स्पिड से गाडी चल पडी,सिग्नल पे रेड लाईट दिखा मै रुक गया सोच में पड गया "नोकरी छोडके मैने कोई गलति तो नहि कि?"तभि आँखो पे चमक पडी,मेरा हात एक दम से आँखो पे आ गया,कुछ पल आँखो पे हि रहा,वो चमक उपर से आयि,मैने आस्मान में देखा,वो तारा उसकि जगह वापस आ गया था,उस चमक पहलेसे कई ज़्यादा थि,मेरे सवाल पे वो जवाब बनके आया था,मानो वो मुझे मेरा अधुरा सपना पुरा करने के लिए फिरसे बुला रहा हो,उसको देख के चेहरे पे मुस्कुराहट आ गई मानो बरसो के बाद कोई बिछड़ा हुआ यार मिल गया हो,ग्रिन लाईट लगा और होर्न पे होर्न पडने लगे,मैने accelerator बढाया और घर की तरफ चल पड़ा,वो तारा पहलेकी तरहा अब मेरे साथ चलता है,आस्मान में देखु तो बाकी तारों से कई ज्यादा चमकता है........
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