मंजिल कि बात मैने कि ही नहि
मै रास्तों में ही खुश रहा
मैने किसी और कि परवाह कि ही नहि
मै अपनि हि धुण में मस्त रहा
मैने गलत कोण है इसकी चिंता कि ही नहि
मै घायलों के जख्मों पें मलहम लगाता रहा
मंजिल ने मेरी इबादत कि ही नहि
मै रास्तों से दुवाएं लेता रहा
मुझे जो सहि लगा मै उस पथ पे चलता रहा
मैने सच छुपाने कि कोशिश कि ही नहि
मै झुठ से मुँह फेरता रहा
मैने जिंदगि को किसि और के हात में दिया ही नहि
मैं खुदसे लिखे शब्दों में जिंदगि को सुलझाता रहा
मैं चंद शब्दों में जिंदगि को बेहलाता रहा
मैं चंद शब्दों में जिंदगि को बेहलाता रहा
मै रास्तों में ही खुश रहा
मैने किसी और कि परवाह कि ही नहि
मै अपनि हि धुण में मस्त रहा
मैने गलत कोण है इसकी चिंता कि ही नहि
मै घायलों के जख्मों पें मलहम लगाता रहा
मंजिल ने मेरी इबादत कि ही नहि
मै रास्तों से दुवाएं लेता रहा
मुझे जो सहि लगा मै उस पथ पे चलता रहा
मैने सच छुपाने कि कोशिश कि ही नहि
मै झुठ से मुँह फेरता रहा
मैने जिंदगि को किसि और के हात में दिया ही नहि
मैं खुदसे लिखे शब्दों में जिंदगि को सुलझाता रहा
मैं चंद शब्दों में जिंदगि को बेहलाता रहा
मैं चंद शब्दों में जिंदगि को बेहलाता रहा
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