बेबाक बादल ये बरसे
मै ठेहरा रहा हर एक बुँद समाने को

समंदर कि लेहरे बडी
तुफानों कि चुनोतिया खडी
मै तैरता रहा पार निकल जाने को

सुरज जलते जलते मुझको भि जलाता रहा
मै तडपता रहा छाँव से मिलने को

अकेला रहेता है चाँद तारों के बिच
मैने निंद छोड दि उसका साथ निभाने को

एक एक करके शख्स रुठते गए
मै पुछता रहा "क्युँ?" वजह समझने को

मै भागता रहा जिंदगि के साथ
सिर्फ राख में मिल जाने को

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