हालातों से हारकर जमिन पर गिर गया
मै माँगता रहा मदत हर एक से
हर शख्स पिठ दिखाता गया

कुछ लोग दे गए भरोसा हात जरुर देंगे
मै नादान भरोसा करता गया

बोलते गए अपने 'यही पास हि है मंजिल'
मै बरसौ कहि गयि राह पे चलता गया

बेहकाते गए मुझे खुदसे
मै बेहकावे को सच मानता गया

सब लोग बताते रहे "जाना कहाँ है"
"कैसे?" पुछने पर चेहरा मुकरता गया
मै नादान भरोसा करता गया
:-@bhi

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