मै रात वो सवेरा है
कुछ पल़ो से मिलने से रेह जाता हुँ
मै आग वो हवा है
बुझ जाता हुँ
मै सुरज वो चाँद है
ढल जाता हुँ
मै सवाल वो जवाब है
सुलझ जाता हुँ
मै मुसाफिर वो राह है
चलता जाता हुँ
मै प्यास वो पानि है
मिट जाता हुँ
मै मौत वो जिंदगि है
जी जाता हुँ
मै इंसान वो दुआँ है
माँग लेता हुँ
कुछ पल़ो से मिलने से रेह जाता हुँ
मै आग वो हवा है
बुझ जाता हुँ
मै सुरज वो चाँद है
ढल जाता हुँ
मै सवाल वो जवाब है
सुलझ जाता हुँ
मै मुसाफिर वो राह है
चलता जाता हुँ
मै प्यास वो पानि है
मिट जाता हुँ
मै मौत वो जिंदगि है
जी जाता हुँ
मै इंसान वो दुआँ है
माँग लेता हुँ
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