तुम पुछते हो 

तुम पुछते हो अंधेरे से इतना लगाव क्युँ है,
अंधरे से लगाव नही है बस रोशनी से 
आँखो को तकलिफ होति है

तुम पुछते हो तुमसे प्यार इतना क्युँ  हे,
तुमसे प्यार नही बस नफरत औरो से थोड़ी कम है

तुम पुछते हो जितके भि इतने उदास क्यूं हो,
उदासनही बस जो हारा है उससे थोड़ा लगाव है

तुम पुछते हो क्यु भरोसे से नफरत है,
नफरत नही बस भरोसा टुटने से परहेज है

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