जिंदगि मे मरने से पहले जिना पडता है जिंदगि को जिने से पहले थोडा मरना पडता है

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जिंदगि मे मरने से पहले जिना पडता है  
जिंदगि को जिने से पहले थोडा मरना पडता है


जो वक्त पे ना आए वो बेवक्त होता है
निंद ना आने की वजह कोई तो होता है










एसी बात नही की उम्मिदे नही है
घर मे बडे हो तो त्याग करना पडता है
अगर बात अपनो की हो तो हारना भि पडता है
रिश्ते निभाने के लिए कई बार झुकना पडता है














सुरज जितना चमकने के लिए जलना पडता है
नदि को समंदर से मिलने के लिए मुडना पडता है












बारीश से बचने के लिए कभि कबार बादलो से उपर उडना पडता है
सिर्फ सपने देखने से कुछ नही होता उनपे काम भि करना पडता है










आस्मान छुवने के लिए कई बार जमिन पर गिरना पडता है
हरबार गिरने के बाद उठणा पडता है










जिंदगि मे मरने से पहले जिना पडता है
जिंदगि को जिने से पहले थोडा मरना पडता है

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जिंदगि को जिने से पहले थोडा मरना पडता है' ये कविता अच्छि लगे तो अपने दोस्तो के साथ share जरुर करना


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  1. रास्ता है तो मंजिल होंगी
  2. मै झुकता नही मै झुकाता हुँ
  3. कयुं मे तुझपे ही आके थम जाता हुँ
  4. वो शोहरतों के मुकाम पर थावो जिल्लतो को शुक्रिया केह रहा था
  5. हाँ अब केह सकता हुँ मैने थोड़ी बहोत दुनिया देखी है
  6. उसे बस इंतजार था
  7. वो तु नही है ! वो मै नही हुँ
  8. मै फिर भी चल रहा हुँ

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