ये जमिन तिन रंगो में बटी है
hindi poems:-ये जमिन तिन रंगो में बटी है
ये जमिन तिन रंगो में बटी है
यहाँ चाँद ईद को भि दिखता है,यहाँ चाँद करवाचौथ को भि दिखता है
इस जमिन पे चाँद भि जातियॊ में बटता है
बात सिर्फ हरे या केशरी रंग पे नही मिटति,अशोक चक्र मे लगा निला रंग भि यहाँ जाति में बटता है
तिरंगे का सफेद रंग शांति का है वो हमेशा कफन पे ही जचता हैं
सब लोग एकता की बात करते है यहाँ झगडा मंदीर और मस्जिद की "म" पे होता है
ये मत समझना की हम लोग अलग है कोई दुसरा ऊँगलि उठाए तो उसका विरोध मै हिंदुस्थानि हुँ इस बात से ही होता है
ये जमिन तिन रंगो में बटी है
यहाँ चाँद ईद को भि दिखता है,यहाँ चाँद करवाचौथ को भि दिखता है
इस जमिन पे चाँद भि जातियॊ में बटता है
बात सिर्फ हरे या केशरी रंग पे नही मिटति,अशोक चक्र मे लगा निला रंग भि यहाँ जाति में बटता है
तिरंगे का सफेद रंग शांति का है वो हमेशा कफन पे ही जचता हैं
सब लोग एकता की बात करते है यहाँ झगडा मंदीर और मस्जिद की "म" पे होता है
ये मत समझना की हम लोग अलग है कोई दुसरा ऊँगलि उठाए तो उसका विरोध मै हिंदुस्थानि हुँ इस बात से ही होता है
Comments
Post a Comment