क्या हैसियत की बात करता है
यहा सुरज भि शाम को डुबता है
घर मे बैठ के क्या शेर बनता है
दुनिया मे पैर रख यहाँ हर गुरुर टुटता है
यहाँ परछाई का अंधेरो मे साथ छुटता है
और तु इंसानो की बात करता है
ये ज़माना सिर्फ पैसो की भाषा समझता है
इस दुनिया मे हर शिकारी तेरे जैसा शिकार धुँडता है
इस दुनिया मे हर रिश्ता बिकता है
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