ना हैं सपने ना है अपने
अंधेरे ही आँखो के सामने
चलता जाता
थोडा रुकता
हर घडी हर मोड
मै गिरता मै संभलता
आस नही है कोई पास नही है
जिने का मुझमे कोई एहसास नही है
अंधेरे ही आँखो के सामने
चलता जाता
थोडा रुकता
हर घडी हर मोड
मै गिरता मै संभलता
आस नही है कोई पास नही है
जिने का मुझमे कोई एहसास नही है
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