सबको आगे जाते हुए देख रहा हुँ ,उनको अपने मुकाम पाते हुए देख रहा हुँ,मै एक ही जगह पे अटक गया हुँ,मुझे मेरी मंझील नही दिख रही,मै अकेला नही हुँ मुझे साथ है खुदका,मै खुदके भरोसे ही चल रहा हुँ,एसी परिस्थितियों मे मुझे मेरे शब्द साथ देते हेै,मेरे अंदर का गुस्सा मेरी कलम कागज पे उतार देती है,मुझे खुदा ने आवाज इतनि अच्छि नही बक्क्षि है मगर खुदा ने मुझे शब्द बक्क्षे है परीस्थितीयों अनुसार उन शब्दो की नियत बक्क्षि है,मै ये लिखता हूँ ये आपसे मेरी वाहवाई सुनने के लिए नही मेरे अन्दर बहोत सी बाते है बहोत सी चिजें है जो अंदर दबी पडी है मेरे पास बस यही एक जरीया है उन्हें बाहर निकाल ने का,मेरे शब्द आपको गुस्सा दिला सकते है या फिर खुशी दे सकते है या फिर प्रेरणा दे सकते है हाँ मगर मेरे शब्द आपको मायुस नही कर सकते मै उस दौर के बारे मे लिखता हुँ जिनसे मै गुजर गया हुँ या फिर गुजर रहा हुँ आप खुदको मेरे शब्दो मे देख सकते है अगर आप उस दौर से गुजर गये होंगे या फिर गुजर रहे होंगे आप खुदको मेरे शब्दो मे देख सकोंगे जब आप उस दौर से गुजरोंगे,मेरे लिखने का मकसद आपकी टालियाँ पाना नही मेरा मकसद है गुजरे हुए लम्हे मेरे शब्दो मे आपको फिरसे जिने को मिले आपके आँखो मे जो हलकासा आँसु आए वो खुशि से आए मैने जो लिखा ह़ै वो पढते वक्त आपके चेहरे पे मुस्कुराहट आए बस यही कुछ वजह हेै मेरे लिखने की अच्छा लगे तो मुस्कुरा दिजिऐंगा बुरा लगे तो छोड दिजिऐंगा

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