तेरी घर की चार दिवारे तेरी आहट रोक लेति है
एक पैर घर के बाहर तो रख ये हवा मेरी दोस्त है मुझे आके बता ही देती है
कभि कभार ये हवा तेरी झुल्फो को छुवा एसा कहके चिधाति भि है,वैसे ये भि तेरी आशिक है बस मेरी तुझसे आशिकी उससे थोडी ज्यादा है ये वो जानति है
ये मुझे देख के मुँह ना मोडा कर बारीश भि दुर की रिश्तेदार है चिधके बरस ही जाति है
तु सुबेह जरुर निकलति है इसिलिए ये सुरज इतना चमकता है
तुझे रात मे निकलने की पाबंदी है ये चाँद सिर्फ इंतजार करता रहता है

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