तुझसे सच बोलणे की ताकद ना थी,मै खुदसे ही झुठ बोल बैठा
तुझे जो बताना था वो मै जानबुझके भुल बैठा
कहा है बता दे ए मंजिल तुझे ढुँढते ढुँढते मै राह भटक बैठा
तेरी तस्विर की तलाश मे
मै तेरा तसव्वुर भि खो बैठा
मै जिल्लतों को मिलने से पहेले शोहरतों को मिल बैठा
ये बात एसी हुई की मै जिणे से पहेले ही मर बैठा
आदत नही मुझे सुनने की,मुझे जहा तैरणे को कहा मै बस वही डुब बैठा
जहा जमीन नही मै वहा मेरा आँशिया बना बैठा
कुछ करने की चाहत मे मै रात को दिन और चाँद को सुरज कर बैठा
मै चलने को तयार था मेरा पैर जवाब दे बैठा
हजार ख्वाहीशे थी मै एक ख्वाहीश पे ही मर बैठा
मै फिरसे प्यार करने को तयार था मेरा दिल जवाब दे बैठा
मै तो चुपचाप खडा था ...."तुझसे प्यार नही" ये बात दिल ही बोल बैठा
















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