एक खयाल

बस तसल्लि के लिए आँखे बंद कर लेता हुॅ
क्युँकी बरसो से निंद का कोई जवाब नही आया
पडेपडे करवटे बदल लेता हुँ
एक खयाल है वो बदलने का खयाल नही आया

Comments

Popular posts from this blog

janta hu