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ये कैसि तेरि जालिम मेरी तुझपे मोहब्बत है पल पल बस तबाह किए जाति है इस उडते धुवे के साथ हर एक याँद मिटाति जाति है बाहर से खुद भि जलति जाति है अंदर से मुझे जलाति जाति है इश्क मुझसे करति भि नहि नफरत तुझसे होने भि नहि देति है तु पुरी जल जाति है,मुझे बचाकुचा पुरा जलाने के लिए  फिरसे पहले सिरे से जलना शुरु हो जाति है
अफवाओं में "मै" अलग अलग मुझे बहोत बार आया सुनने को मै ठेहरा रहा बरसों तक असलि "मै" बताने को हजार आवाजे थि मुझे मेरी मंजिल बताने को मै चलता रहा बरसों तक मेरी खुदकी आवाज सुनने को सौ याँदे थि मुझे पिछे कल में ले जाने को मै आगे कल कि ओर बढता रहा एक दों वादें निभाने को मेरी जंग नहि थि फिर भि लढता रहा दिए हुए वादों का साथ देने को मै लढता रहा ये जानते हुए भि कि साथि तयार है बिच लढाई में मेरा साथ छोड जाने को :-@bhi
हार से पार हुँ मै जित का त्योंहार हुँ मुश्किलो से क्युँ डरुँ उनका तो मै यार हुँ शोहरतों का वार हुँ मै जिल्लतो का प्यार हुँ तकदिर से खाई हुई मार हुँ अफताब मै उगने के लिए तयार हुँ कलियुग का अवतार हूँ मै खुदसे आई पुकार हुँ बुराई में दरार हुँ मै अच्छाई की दरकार हुँ प्यार का इजहार हुँ मै विश्वास का इकरार हुँ वफाई कि दिवार हुँ मै बेवफाई पे धिक्कार हुँ तुफानो में कश्तियो कि पतवार हुँ तेरी सलामति पे जान निसार हुँ जिंदगि का तेरी पहरेदार हुँ मै हार से पार हुँ :-@bhi
जिन्दा हुँ अब तक ये सबुत है कि कमजोर नहि हुँ मै जमाने से डरा नहि हुँ खुदसे डर गया हुँ मै जिंदगि में कुछ हिस्से थे अपने आज बस उनके किस्सो में याद हुँ मै अंजान नहि मै खुदसे खुदकी नजर में आज़र्दाह अजनबि हुँ मै अहिस्ता आह भर लेता हुँ मै मै अफसानानविस अफसाना हर एक अधुरा छोड देता हुँ मै :-@bhi
मैफिले जिसके नफरतो की लगी थि,मै उसकि तारीफ कर बैठा जिसके खिलाफ शिकायते आ रहि थि,मै उसकि खासियते बोल बैठा उसके दुश्मनो के इलाके में,मै उसको अपना दोस्त बता बैठा जख्म जिससे आए,मै उसीके हात में नमक दे बैठा जो बात याद रखनि थि,मै बस वहि बात भुल बैठा जिसके खिलाफ जाने की साजिशे हो रहि थि,मै उसका हि साथ दे बैठा बात जिसे मारने कि हो रहि थि,मै उसि को बचा बैठा जो नहि करना था,मै नादान वहि कर बैठा :-@bhi
ना राहि,ना राह,ना मंजिल ना उसकि चाह मै अकेला हुँ अकेला हि रेहना पसंद करता हुँ मै सुरज हुआ तो दिन में हि निकलना पसंद करता हुँ मै रात के अंधेरे में अकेला चाँद होना पसंद करता हुँ बात एसि नहि कि तुम मुझे बुरा समझते हो, अच्छा है तुम वो समझते हो, मै बुरा समझा जाऊँ,मै वहि पसंद करता हुँ बहोत बार सुना है मै समझता नहि कुछ, तुम मुझे नासमझ समझो सच बताता हुँ,मै नासमझ समझ जाना हि पसंद करता हुँ :-@bhi
हालातों से हारकर जमिन पर गिर गया मै माँगता रहा मदत हर एक से हर शख्स पिठ दिखाता गया कुछ लोग दे गए भरोसा हात जरुर देंगे मै नादान भरोसा करता गया बोलते गए अपने 'यही पास हि है मंजिल' मै बरसौ कहि गयि राह पे चलता गया बेहकाते गए मुझे खुदसे मै बेहकावे को सच मानता गया सब लोग बताते रहे "जाना कहाँ है" "कैसे?" पुछने पर चेहरा मुकरता गया मै नादान भरोसा करता गया :-@bhi